शनिवार, 23 अगस्त 2008
शुक्रवार, 22 अगस्त 2008
अभिनव बिंद्रा : परिचय
बीजिंग की धरती पर जब राष्ट्रीय धुन 'जन गण मन' की धुन प्रारंभ हुई, तो देश की 1 अरब से ज्यादा आबादी का सीना चौड़ा हो गया और तमाम खेलप्रेमियों में यह आस भी जगी कि नहीं...हमारे देश के खिलाड़ी भी ओलिम्पिक से सोना बटोर सकते हैं और इसे जीता भारत के अभिनव बिंद्रा ने
अभिनव के उद्योगपति पिता एएस बिंद्रा और माँ बबली बिंद्रा के असीम प्रोत्साहन ने उनके इस शौक में कोई बाधा नहीं आने दी और पुत्र ने अपने दृढ़ निश्चय से पदक हासिल किया ।अभिनव बिंद्रा : परिचय
* 28 सितम्बर 1983 में देहरादून में जन्म
* 15 बरस की उम्र से निशानेबाजी की शुरुआत
* 1998 में राष्ट्रमंडलीय खेलों भाग लेने वाले सबसे युवा निशानेबाज
* 2000 के सिडनी ओलिम्पिक खेलों में हिस्सा लेने वाले सबसे युवा निशानेबाज
* 2001 में निशानेबाजी में अर्जुन पुरस्कार
* 2001 में मैनचेस्टर में आयोजित निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक
* 2002 में राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार
* 2002 में राष्ट्रमंडल खेलों की 10 मीटर एयर रायफल के युगल में स्वर्ण, एकल में रजत
* 2004 के एथेंस ओलिम्पिक में ओलिम्पिक रिकॉर्ड, लेकिन पदक जीतने से चूके
* 2008 के बीजिंग ओलिम्पिक खेलों की 10 मीटर एयर रायफल में स्वर्ण पदक
भारत को मिडिलवेट मुक्केबाजी का कांस्य
बुधवार, 20 अगस्त 2008
विजेंदर का पदक पक्का
बीजिंग ओलिम्पिक के मुक्केबाजी रिंग में भारत के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। मुक्केबाज विजेन्दर ने आक्रमण और बचाव की कुशल रणनीति अपनाकर आज बीजिंग ओलिम्पिक में पदक पक्का करके भारतीय मुक्केबाजी में नया इतिहास रचा लेकिन उनके साथी जितेंदर कुमार अच्छे प्रयासों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल करने से चूक गए। विजेन्दर ने मुक्केबाजी के मिडिलवेट (75 किग्रा) वर्ग में इक्वाडोर के अपने प्रतिद्वंद्वी कार्लोस गोंगोरा को आसानी से अंकों के आधार पर 9-4 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया, जिससे उन्हें कम से कम कांस्य पदक मिलना तय है।
2-2 मिनट के सभी चार राउंड में विजेन्दर हावी रहे। उनका आक्रामण और सुरक्षात्मक शैली गजब की थी। बेहद आत्मविश्वास में दिखाई दे रहे विजेन्दर ने पहले राउंड में 2, दूसरे में 2, तीसरे में 3 और चौथे में 2 अंक प्राप्त किए जबकि गोंगोरा दूसरे, तीसरे राउंड में 1-1 तथा चौथे राउंड में 2 अंक ही प्राप्त कर सके। सेमीफाइनल में विजेन्दर को क्यूबा के इमेलियो कोरिया की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा लेकिन आत्मविश्वास से ओतप्रोत यह मुक्केबाज इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं मुकाबले दर मुकाबले आगे बढ़ रहा हूँ और मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक है। विजेन्दर से पहले जितेन्दर कुमार फ्लाइवेट (51 किग्रा) वर्ग के क्वार्टर फाइनल में कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद रूस के जॉर्जी बलाकशिन से 11-15 से हारकर बाहर हो गए। जितेन्दर के साथी मुक्केबाज अखिल कुमार (54 किग्रा) भी अंतिम आठ में पराजित हुए थे। विजेन्दर ने इन दोनों की हार से सबक लेकर आक्रमण और बचाव की रणनीति को बहुत अच्छी तरह से लागू किया। उन्होंने पहले दौर में ही 2-0 की बढ़त बनाकर अपने प्रतिद्वंद्वी पर हावी होने के संकेत दे दिए थे। हरियाणा के इस मुक्केबाज ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने दोनों हाथ से दनादन घूँसे जड़कर गोंगोरा को पस्त कर दिया।
भारत को कांस्य पदक की बधाई
ओलिम्पिक खेलों की कुश्ती मैट से एक अच्छी खबर आई है। भारत के सुशील कुमार 66 किलोग्राम वर्ग के अर्न्तगत रेबोचार्ज मुकाबले में रूस के बेत्रोव को तीन राउंड में से दो राउंड जीतकर क्वार्टर फाइनल में पहुँचे और वहाँ उन्होंने कजाकिस्तान के पहलवान को हराकर काँस्य पदक जीता।
काँस्य पदक के लिए रेबोचार्च के मुकाबले लड़े जाते हैं और सुशील क्वार्टर फाइनल कें कजाकिस्तान के पहलवान को धराशायी करने में सफल रहे। 1952 के बाद यह पहला अवसर है जबकि कुश्ती में भारत ने काँस्य पदक जीता है। उस वक्त केडी जाधव ने यह कामयाबी हासिल की थी। रेबोचार्ज के मुकाबले तब होते हैं, जब किसी पहलवान का स्वर्ण और पदक के लिए पहुँच जाता है, तब उस पहलवान से परास्त हुए पहलवानों के बीच काँस्य पदक के लिए मुकाबला लड़ा जाता है। आज सुबह सुशील जिस पहलवान से परास्त हुए थे, उसके फाइनल में पहुँचने के साथ ही उनका रेबोचार्ज के लिए मुकाबला तय हो गया था। रेबोचार्ज में सुशील रूसी पहलवान बैत्रोव पर पूरी तरह हावी रहे और उन्होंने 3 राउंड में से 2 राउंड जीतकर क्वार्टर फाइनल की सीट बुक की थी और उन्हें काँस्य पदक जीतने के लिएहर हाल में कजाक पहलवान को हराना था। चूँकि नियमों की अधिक जानकारी पहलवानों को नहीं थी, लिहाजा यह माना जा रहा था कि कुश्ती में अब भारत की आखिरी उम्मीद राजीव तोमर ही बचे हैं, लेकिन सुशील कुमार की जीत ने एक बार फिर पदक की आस जगा दी थी। सुशील ने अपने हुनर से इन उम्मीदों को जाया नहीं होने दिया। जैसे ही वह काँस्य पदक जीते वैसे ही भारतीय खेमे में खुशी की लहर छा गई और महाबली सतपाल ने उन्हें सीने से लगा लिया। यहाँ पर याद रखने वाली बात यह है कि सुशील की चुनौती सिर्फ काँस्य पदक के लिए थी क्योंकि फाइनल में स्वर्ण और रजत के दावेदार पहले ही तय हो चुके थे। सनद रहे कि सुशील कुमार को क्वालीफिकेशन राउंड में बाय मिला था। पूर्व क्वार्टर फाइनल में उन्हें यूकेन के एंद्रेई स्टाडनिक ने 8-3 से शिकस्त दी। ओलिम्पिक कुश्ती में भारतीय पहलवान राजीव तोमर का अभियान भी अभी बाकी हैं, जो 120 किलोग्राम भार वर्ग में चुनौती पेश करेंगे।
शनिवार, 16 अगस्त 2008
सोमवार, 11 अगस्त 2008
बिंद्रा ने इतिहास रच भारत को दिलाया सोना
बीजिंग। भारत के निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक खेलों की 10 मीटर एयर रायफल स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया। इसके साथ ही वह भारत के ओलंपिक इतिहास में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
ओलंपिक में हाकी को छोड़कर भारत कभी किसी खेल में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया था लेकिन बिंद्रा ने नया इतिहास रचते हुए न केवल स्वर्ण जीता बल्कि भारत को बीजिंग ओलंपिक की पदक तालिका में भी स्थान दिला दिया। 25 वर्षीय बिंद्रा ने भारत को 28 वर्षो के अंतराल के बाद ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाया। भारत ने वर्ष 1980 के मास्को ओलंपिक में हाकी का स्वर्ण जीता था। भारतीय निशानेबाजों से पदक की जो उम्मीदें लगाई जा रही थीं उसे राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुके अभिनव ने पूरा कर दिखाया। वह निशानेबाज राज्यवर्द्धन राठौर से एक कदम आगे बढ़ गए जिन्होंने एथेंस ओलंपिक में रजत पदक जीता था। अभिनव ने 10 मीटर एयर रायफल स्पद्र्धा का स्वर्ण 700.5 के स्कोर के साथ जीता। उनके स्वर्ण जीतते ही वहां रेंज में मौजूद सभी भारतीय समर्थक खुशी से झूम उठे। मेजबान चीन के जू किनान ने 699.7 अंकों के साथ रजत पदक जीता जबकि फिनलैंड के हेनरी हक्कीनेन ने 699.4 अंक हासिल करके कांस्य पदक प्राप्त किया।
बिंद्रा की जीत से उत्साहित भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा, 'वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज है और मुझे लगता है कि उसके इस प्रदर्शन से पूरे दल का मनोबल बढ़ेगा।' राष्ट्रीय कोच सन्नी थॉमस ने कहा, 'हम सभी काफी खुश हैं। वह कड़ी मेहनत करने वाला एथलीट है। पूरा निशानेबाजी दल जश्न मना रहा है। हमें उस पर गर्व है और यह तो सिर्फ शुरुआत है। अभिनव काफी धैर्य और संयम रखने वाला लड़का है और वह अति उत्साहित नहीं होता।' खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित बिंद्रा ने इससे पहले 2002 राष्ट्रमंडल खेलों की युगल स्पर्धा में स्वर्ण जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
इससे पहले गगन नारंग इसी स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश करने से चूक गए थे। वह 600 में से 595 अंक जुटाकर नौवें स्थान पर रहे। नारंग ने 97, 100, 100, 100, 98, 100 के राउंड खेले।
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शुक्रवार, 8 अगस्त 2008
शुभंकरों के नाम बताओ....
खेलों के इस महाकुम्भ में विश्व भर के देश, उनके परिधान, राष्ट्र ध्वज, विविध खेल, खिलाडी और विजेताओं से परिचय होना कुतूहल बन जाया करता है।
चीन ने १६०० अरब डालर खर्च कर स्पर्धा की मेजबानी का बीडा उठाया है। बीजिंग २००८ के प्रतीक के साथ ही इस बार हमे शुभंकरों में शामिल पञ्च सदस्यीय दल ऐतिहासिक रूप से पहली बार प्रस्तुत हैं।
इन पाँचों केरेक्टर्स के नाम क्या हैं?
गुरुवार, 7 अगस्त 2008
हमारा ओलिम्पिक
खेल महाकुम्भ नजदीक क्या , कल ही से शुरू होने वाला है। हम भारतीय कितने प्रतिनिधि खिलाड़ियों के साथ किन किन खेलों में शामिल हो रहे हैं और कितने पदकों की दौड़ में शामिल हैं यह बात ब-मुश्किल कुछेक लोग जानते होंगे।
हम निश्चित तौर पर उन्ही खिलाड़ियों से आस लगाए बैठे होंगे जिन्होंने गई मर्तबा अपना जोरदार प्रदर्शन किया है , पदक भले ला पाने में असमर्थ रहे तो क्या? किंतु हम कोई नई प्रतिभा अवश्य ही नही ढूंढ पाये , यह भी तय ही है। हमारी हॉकी की टीम इस बार नही खेलेगी इसकी चिंता बीच में की गई और राजनितिक बखेडा खड़ा कर शान्ति बहाल है।
स्थानीय स्तर पर खेलने वाले खिलाडी गुपचुप तरीके आजमा कर राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर जाने कैसे भी नौकरियां हासिल कर स्वार्थ सिद्ध कर चुके होंगे यह भी हमारे लिए गौण बातें हैं। देश के इतिहास को जाने तो ओलिम्पिक के ८८ वर्षीय समय में मात्र १५ पदक हमारे खाते में दर्ज हुए हैं , जो हमारा अब तक का रिकॉर्ड है।
खेलना ज्यादा जरुरी है या खेल नियम या दोनों ? खेल बजटप्रतियोगिता की नियमितता ?, प्रशिक्षकों की वयवस्था? इत्यादि प्रश्नों पर हमारी खामोशी भी बड़ी अचम्भे से भरी हुई है।
दोष निकालने वालों की संख्या अधिक है बजाय उपायों को दर्शाने के ।
मूलतः कुछ करने दिए जाने के निरंतर प्रयासों की उपेक्षा ही देश में देश-भक्ति और अन्तर-राष्ट्रीय विचारधारा में क्षीणता के कारक हैं। एक अड़चन हमारे विकृत विचार भी , जिसकी वजह से अपने सुख को पाना तो चाहते है परन्तु किसी को आगे बढ़ते देखना कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते।